अंतर-युद्ध!

ह्रदय में संवेदना है, मत्स्य नयन को भेदना है,निश्चय नितदिन कर रहा हूँ, मैं परस्पर मर रहा हूँ। आंख में हैं आंसू मेरी, और दिल में याद तेरी,प्यार तुमसे है परंतु, कहने से मैं दर रहा हूँ। पक्षी क्षितिज में घूमते हैं, सूर्य किरण को चूमते हैं,पंख मेरे कट गए हैं, पर उड़ाने भर रहा…

भूख!

भीख में और भूख में अंतर बता सकते हो क्या?भीख की भूखी कोई सूरत दिखा सकते हो क्या?दिखे कोई आसमां की चादर ओढ़े जब तुम्हें,तुम भी इस ज़मीन को बिस्तर बना सकते हो क्या? जानता हूँ, ”ना” कहोगे, या झुका लोगे नज़र,इतनी कोई उम्मीद भी तुमसे नहीं रखता मगर,भूखा कोई कम उम्र बच्चा, राह में…

बेकसी !

कुछ खो गया है, मैं नहीं जानता क्या? लेकिन कुछ है जो मेरे सामने था, मैंने उसे देखा नहीं कभी, लेकिन अब उसकी बहुत याद आती है। कैसे बताऊँ की जो खो गया, और जो अब मेरे पास नहीं है, और जिसे मैंने देखा भी नहीं, मेरे लिए कितना अनमोल था। अब उसे याद करके…

एक ख़त!

तुम जवाब लिखोगी क्या इस खत का? कोई ख़्वाहिश है जो मुझे सताती रहती है। बारिश की बूंदों में भीगे तुम्हारे कमल नयन मेरी निगाह को बाध्य कर देते हैं तुम्हें निहारने के लिए। तुम ना जाने क्या सोचती होगी मेरे बारे में। यकीन मानो तुम हो ही इतनी खूबसूरत की मेरा दिल मजबूर हो…

वैलेंटाइन्स डे!

तेरे नाम के गुलाब जानाना, और चॉकलेट भी मैंने खरीदी एक मिट्टी की गुड़िया में सहेजा इज़हार के पल को और चुम्बन को फिर सबको आलिंगन देकर तुझ से किये वादों को निभाया और तेरे बिन, तेरी याद संग  वैलेंटाइन्स डे मैंने मनाया।  अब तुम जो चाहे वो कह लो, ताने-अपशब्द या अभिषाप, मझको जितने…

जो कुछ भी हुआ

जो कुछ  भी  हुआ मेरी बला  से  वो ठीक थामैंने  प्यार किया उसने वफ़ा  ये  भी  ठीक थामैं  भी चला  वो  भी  चली राहों  में  प्यार  कीमंज़िल ना किसी को मिली क्या ये भी ठीक था। याद  है  मुझको जब  वो  नाराज़ होती थीनाक  मुँह सिकोड़  के  दिन रात रोती  थीखयाल  से  उसके मेरा फिर…

वीर किसान

खेत होता है मंदिर जिसका, फसल होती भगवान, समय आने पर बिना गबन के भरता है जो लगान, कर्ज़ में डूबा है क्यों बोलो, ऐसा वीर किसान। जिसके घर से नहीं लौटता भूखा कोई मेहमान, जिसकी मेहनत के फल को ही खाता हर इंसान, भूखा सोता है क्यों बोलो, ऐसा वीर किसान। नहीं बेचता कभी-भी…

कभी-कभी

आज भी तुम याद आती हो कभी कभी क्या करें दिन रात आती हो कभी कभी भूल जाऊंगा मैं तुमको, सोचता तो हूँ भूलने के बाद आती हो कभी कभी सात कस्में साथ मिलकर हमने खाई थी हर कसम के साथ आती हो कभी कभी मैं ज़िंदा हूँ शायद तेरे दीदार की ख़ातिर तुम ओढ़कर…

बार-बार….

कुछ सख्स बेज़ार क्यों करते हैं बार-बार, मरहम लगाके जख्म क्यों देते हैं बार-बार। आब-ए-दीदाह का कारण हैं वो मेरे गिरेबाँ अपना क्यों भिगोते हैं बार-बार। उनकी कहानी का मैं जब अंश ही नहीं मेरी व्यथा फिर क्यों पिरोते हैं बार-बार। वो कद्र करते है मेरे जज्बात की फिर क्यों जताने से अपनापन वो डरते…

एक प्रेम कहानी मेरी भी!

कहती नहीं है, प्यार वो मुझसे करती है मेरी भाँति इज़हार से वो भी डरती है, खोया रहता हूँ मैं, यादों में जिसकी, वो भी मुझको याद हमेशा करती है। वो जैसे चांद का फूल गगन के आंगन में, सालों से मैं,  जिसे तोड़ना चाहता हूँ, वो दिखे बसंत में और दिखे वो सावन में,…