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मैं तुम्हे भूल जाना चाहता हूँ
तुम मुझे याद क्यों नहीं आती।

— Nitish Adhana —

लौटकर आएगी वो, मुझको गुमां होता तो है
लौटकर आएगी वो, मुझको यक़ीं है ही नही।

—Nitish Adhana —

भरी-भरी मेरी आँखों से बरसता है,
मेरा लहू तेरे दीदार को तरसता है।

— Nitish Adhana —

ज़रूरतें सिखाती हैं खुदबखुद सब कुछ
साँस लेने का सलीक़ा तो सीखा नहीं मैंने।

Nitish Adhana

मैं तुम्हे खो देना चाहता हूँ ताकि
तुम्हे पाने की कोशिश में लगा रहूँ।

— Nitish Adhana —

मिज़ाज़-ए-ख्वाहिश भी ज़रूरी है, लेकिन
पत्तों के बिना दरख़्त भी अर्थहीन है।

—Nitish Adhana—